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इंदौर

मुख्यमंत्री के प्रभार वाले इंदौर में रात के अंधेरे में ‘लकड़ी का खेल’!  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
मुख्यमंत्री के प्रभार वाले इंदौर में रात के अंधेरे में ‘लकड़ी का खेल’!

 

वन माफिया बेखौफ; देर रात मंडी में अवैध लकड़ी से लदे वाहनों की आवाजाही की चर्चा,गश्ती दल और आरा मशीनों की निगरानी पर सवाल!

इंदौर।इंदौर हरियाली के क्षेत्र में लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है, लेकिन शहर की लकड़ी मंडी में रात के अंधेरे में कथित अवैध लकड़ी के परिवहन की चर्चाओं ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि आयशर,छोटा हाथी,टाटा पिकअप,अशोक लीलैंड समेत कई वाहनों से देर रात और तड़के लकड़ी मंडी तक लकड़ी पहुंचाई जा रही है। सवाल यह है कि डीएफओ ने गश्ती दल गठित कर रखे हैं तो इन वाहनों की आवाजाही उनकी नजरों से कैसे बच रही है?

सोमवार को ही क्यों सतर्क हो जाता है माफिया?

मंडी से जुड़े लोगों के बीच चर्चा है कि सोमवार की गश्त के दौरान अवैध लकड़ी के कारोबारियों में अधिक सतर्कता रहती है। कुछ दिन पहले एक महिला वन अधिकारी द्वारा कथित रूप से लकड़ी से भरा वाहन पकड़कर वन विभाग परिसर में खड़ा कराने की कार्रवाई का हवाला भी दिया जा रहा है। इसके बाद सोमवार की गश्त को लेकर माफिया के सतर्क रहने की चर्चा है।

आरा मशीनों तक पहुंच रही लकड़ी, जांच पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल लकड़ी मंडी में संचालित आरा मशीनों को लेकर उठ रहा है। चर्चा है कि संदिग्ध लकड़ी से लदे वाहन पहले मंडी पहुंचते हैं और इसके बाद लकड़ी आरा मशीनों पर उतारी जाती है। वहां चिरान किए जाने की बात भी कही जा रही है। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि आरा मशीनों में पहुंचने वाली लकड़ी का स्रोत और वैध दस्तावेज क्या हैं।

गश्ती दल की लाइव लोकेशन से खुल सकता है राज

वन विभाग की गश्ती व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच मांग है कि DFO लाल सुधाकर सिंह रात के समय गश्ती दल की लाइव लोकेशन की जांच करें और अचानक मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करें। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि गश्ती दल वास्तव में संवेदनशील इलाकों में मौजूद है या नहीं।

     स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि वरिष्ठ अधिकारियों को मंडी में अवैध परिवहन बंद होने की जानकारी दी जा रही है,जबकि गुरुवार-शुक्रवार की देर रात भी कथित रूप से लकड़ी से भरे वाहनों की आवाजाही की चर्चा सामने आई है।

मुख्यमंत्री से वन विभाग की समीक्षा की मांग

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रभार वाले जिले इंदौर में उठ रहे इन सवालों के बीच वन विभाग की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय समीक्षा की मांग उठ रही है। यदि आरोप निराधार हैं तो रात की औचक जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है और यदि अवैध परिवहन चल रहा है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।

हरियाली में रिकॉर्ड बनाने वाले इंदौर में अवैध लकड़ी परिवहन का भी कोई नया रिकॉर्ड न बन जाए—अब निगरानी व्यवस्था की असली परीक्षा है।

इन इलाकों से इंदौर पहुंच रही लकड़ी से भरी गाड़ियां

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इंदौर की लकड़ी मंडी तक कथित रूप से लकड़ी से भरे वाहन कई मार्गों से पहुंच रहे हैं। इनमें खरगोन,धार, धामनोद,मनावर, कुक्षी,सरदारपुर, बाग,टांडा, अलीराजपुर, झाबुआ,मानपुर, घाटाबिल्लौद और बेटमा शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा देवास,उज्जैन, बदनावर,सीहोर, सोनकच्छ, शाजापुर, सारंगपुर,देपालपुर और सांवेर की ओर से भी वाहनों के आने की चर्चा है। सवाल है कि इन मार्गों पर वन विभाग की चौकियां है? निगरानी और जांच व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

फ़ोटो एआई द्वारा निर्मित

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