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मौसम बदला तो बिगड़ी सेहत: जिला अस्पताल की ओपीडी 500 से बढ़कर 800 पार, वायरल के साथ चर्म रोगियों की संख्या बढ़ी  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
मौसम बदला तो बिगड़ी सेहत: जिला अस्पताल की ओपीडी 500 से बढ़कर 800 पार, वायरल के साथ चर्म रोगियों की संख्या बढ़ी

 

बारिश-उमस के बीच दाद-खाज, फंगल इंफेक्शन और एलर्जी के मरीज बढ़े; सुबह से अस्पताल में कतार, 45 प्रशिक्षु डॉक्टरों ने संभाली व्यवस्था

धार। जिले में लगातार बदल रहे मौसम का असर अब लोगों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। बारिश, उमस और तापमान में उतार-चढ़ाव के बीच जिला अस्पताल की ओपीडी में मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सामान्य दिनों में जहां प्रतिदिन 400 से 500 मरीज उपचार के लिए पहुंचते थे, वहीं इन दिनों यह संख्या बढ़कर 700 से 800 तक पहुंच रही है। वायरल बुखार, सर्दी-खांसी और बदन दर्द के साथ चर्म रोगियों की संख्या भी बढ़ी है।

बारिश के बाद बढ़ी नमी के कारण दाद-खाज, खुजली, लाल चकत्ते, फंगल इंफेक्शन, फोड़े-फुंसी और त्वचा पर एलर्जी की शिकायत लेकर मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों के साथ युवा भी इन मौसमी परेशानियों की चपेट में आ रहे हैं। निजी अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या बढ़ने की जानकारी सामने आ रही है।

        सुबह से पंजीयन काउंटर पर भीड़

पिछले कुछ दिनों से जिला अस्पताल में सामान्य दिनों की तुलना में मरीजों की भीड़ बढ़ी है। सुबह से ही पंजीयन काउंटर और ओपीडी के बाहर मरीजों की कतार लग रही है। चिकित्सकों के अनुसार मौसम में बदलाव के दौरान शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होने से वायरल संक्रमण बढ़ सकता है। वहीं उमस और नमी के कारण त्वचा संबंधी संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।

        45 प्रशिक्षु डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा

जिला अस्पताल को हाल ही में विभिन्न मेडिकल कॉलेजों से करीब 45 प्रशिक्षु चिकित्सक तीन माह के प्रशिक्षण के लिए मिले हैं। इनकी मौजूदगी से बढ़ी ओपीडी को संभालने में मदद मिल रही है। एक कक्ष में तीन से चार डॉक्टर मरीजों की जांच कर रहे हैं। इससे मरीजों को लंबे समय तक कतार में खड़े रहने की परेशानी कम हुई है। प्रशिक्षु डॉक्टर मरीजों की समस्या सुनने के साथ पर्ची पर बीमारी और उपचार से जुड़ी जानकारी भी दर्ज कर रहे हैं।

        तौलिया-कपड़े साझा करने से बचें

चर्म रोगों से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। दूसरे व्यक्ति का तौलिया, कपड़े, जूते या मोजे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। शरीर के उन हिस्सों को सूखा रखें, जहां पसीना और नमी अधिक रहती है। त्वचा पर लगातार खुजली, चकत्ते या संक्रमण दिखाई देने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेना बेहतर है।

    खानपान और साफ पानी पर दें ध्यान

चिकित्सकों के अनुसार मानसून में साफ पानी पीने के साथ पौष्टिक भोजन लेना चाहिए। तले-भुने और अत्यधिक मसालेदार भोजन से बचकर हरी सब्जियों और संतुलित आहार को प्राथमिकता दें। बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़े तुरंत बदलें और आसपास पानी जमा न होने दें। लगातार बुखार या त्वचा संबंधी परेशानी होने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

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