हाई कोर्ट में सीबीआई जांच के आदेश, दर्ज एफआईआर निरस्त
इंदौर। चर्चित दिनेश मकवाना आत्महत्या प्रकरण में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अहम फैसला सुनाते हुए आबकारी अधिकारी मंदाकिनी दीक्षित को बड़ी राहत प्रदान की है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके साथ ही सीबीआई द्वारा इस मामले में दर्ज की गई एफआईआर भी रद्द कर दी गई है।
यह मामला शराब ठेकेदार दिनेश मकवाना की आत्महत्या से जुड़ा है, जिसने उस समय प्रदेशभर में व्यापक चर्चा बटोरी थी। आत्महत्या के पीछे कथित प्रशासनिक दबाव और कुछ अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। इसी पृष्ठभूमि में मामला हाईकोर्ट पहुंचा था, जहां सुनवाई के दौरान सिंगल बेंच ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आबकारी अधिकारी मंदाकिनी दीक्षित की भूमिका की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया था।
सिंगल बेंच के निर्देश के बाद सीबीआई ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। हालांकि, इस आदेश को चुनौती देते हुए दायर अपील पर डिवीजन बेंच ने विस्तृत सुनवाई की। सुनवाई के बाद अदालत ने सिंगल बेंच के आदेश को पलटते हुए कहा कि उपलब्ध परिस्थितियों में सीबीआई जांच जारी रखने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं। इसी कारण सीबीआई जांच के आदेश निरस्त कर दिए गए और जांच के लिए दर्ज एफआईआर भी समाप्त कर दी गई।
प्रकरण की कानूनी स्थिति बदली
डिवीजन बेंच के इस फैसले के बाद मंदाकिनी दीक्षित के खिलाफ सीबीआई की जांच प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त हो गई है। अदालत के आदेश के अनुसार अब इस प्रकरण में सीबीआई की ओर से कोई जांच आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। इस निर्णय के साथ मामले की कानूनी स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव आ गया है, क्योंकि सिंगल बेंच के आदेश के आधार पर शुरू हुई पूरी सीबीआई कार्रवाई अब प्रभावहीन हो गई है।