शिवपुरी। स्वतंत्रता दिवस पर मध्यप्रदेश के वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। माधव टाइगर रिजर्व में करीब तीन दशक बाद बाघ के शावक का जन्म हुआ है। पन्ना टाइगर रिजर्व से 10 मार्च 2025 को पुनर्वासित कर लाई गई बाघिन MT-4 अब करीब तीन महीने के नन्हे शावक के साथ जंगल में चहलकदमी करती कैमरे में कैद हुई है। शावक के नजर आने के बाद वन विभाग से लेकर वन्यजीव प्रेमियों में खुशी का माहौल है।
पन्ना से आई थी MT-4, अब माधव में बढ़ा कुनबा
बाघिन MT-4 को बाघ पुनर्वास परियोजना के तहत पन्ना टाइगर रिजर्व से माधव लाया गया था। करीब डेढ़ साल के भीतर उसके शावक को जन्म देने की खबर को यहां शुरू किए गए बाघ पुनर्स्थापन अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है। माधव के जंगल में लंबे समय बाद बाघों की नई पीढ़ी का जन्म हुआ है। इससे यहां बाघों की आबादी को स्थायी रूप से बढ़ाने की उम्मीद मजबूत हुई है।
तीन दशक पहले खत्म हो गया था बाघों का कुनबा
माधव क्षेत्र में 1990 के दशक के बाद बाघों की मौजूदगी लगभग खत्म हो गई थी। इसके बाद वर्ष 2023 में यहां बाघ पुनर्वास और पुनर्स्थापन की दिशा में प्रयास शुरू हुए। बाघों को दोबारा जंगल में बसाने के बाद अब शावक का जन्म वन विभाग के संरक्षण प्रयासों के लिए अहम उपलब्धि है।
माधव टाइगर रिजर्व को वर्ष 2025 में देश का 58वां और मध्यप्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। शावक के जन्म से इस दर्जे के बाद रिजर्व की उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है।
रेडियो कॉलर से निगरानी, सुरक्षा भी बढ़ाई
बाघिन MT-4 की गतिविधियों पर वन विभाग की निगरानी बनी हुई थी। रेडियो कॉलर और ट्रैकिंग टीमों के जरिए उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। शावक के दिखाई देने के बाद सुरक्षा और गश्त बढ़ा दी गई है, ताकि मां और शावक को किसी तरह का खतरा न हो।
पर्यटन और रोजगार को भी मिलेगा फायदा
माधव में बाघों का कुनबा बढ़ने से शिवपुरी सहित आसपास के क्षेत्रों में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सफारी, होटल, स्थानीय गाइड और जिप्सी संचालन से जुड़े कारोबार को इसका फायदा मिल सकता है। स्वतंत्रता दिवस पर सामने आई यह तस्वीर मध्यप्रदेश के ‘टाइगर स्टेट’ की पहचान को और मजबूत करने वाली उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है।