डिंडोरी के पीपरटोला में वर्षों से चली आ रही परंपरा, सांप के काटे लोगों को लेकर दूर-दूर से पहुंचते हैं ग्रामीण
डिंडोरी। नागपंचमी आते ही करंजिया मुख्यालय और आसपास के गांवों में आस्था का रंग गहरा हो जाता है। पूजा-पाठ, सत्संग और धार्मिक आयोजनों के बीच ग्राम तरेरा के पीपरटोला में लगने वाला अखाड़ा अलग ही पहचान रखता है। नागपंचमी के दिन यहां सुबह से ही दूर-दराज के ग्रामीण जुटने लगते हैं। मान्यता है कि अखाड़े में आने वाले सांप के काटे लोगों पर पंडा विशेष मंत्र-विधि से उपचार करते हैं।
पीपरटोला में यह अखाड़ा कई वर्षों से स्थानीय ग्रामीणों द्वारा संचालित किया जा रहा है। नागपंचमी पर पहले ठाकुर देव और पूजा स्थल पर विधिवत पूजा होती है। इसके बाद अखाड़े में आने वाले लोगों के नाम दर्ज किए जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, जिन लोगों को सांप काट चुका होता है, उन्हें यहां क्रमवार बैठाया जाता है। अखाड़े के पंडों में से कुछ पर नाग का भाव आने की मान्यता है। इसके बाद मंत्रोच्चार और अखाड़े की धूनी से जुड़ी पारंपरिक विधि शुरू होती है।
लकड़ी और चिमटे से करते हैं पारंपरिक विधि
ग्रामीणों के मुताबिक पंडा विशेष प्रकार की लकड़ी और चिमटे की सहायता से मुंह के जरिए शरीर से जहर खींचने की प्रक्रिया करते हैं। इसके बाद प्रभावित व्यक्ति पर पानी का छिड़काव किया जाता है और उसे स्नान के लिए भेजा जाता है। स्नान के बाद वह दोबारा अखाड़े में पहुंचता है, जहां धूनी और प्रसाद ग्रहण करने के बाद घर लौट जाता है।
मान्यता यह भी है कि जिन लोगों में सांप के काटने का प्रभाव बाकी रह जाता है, उन्हें नागपंचमी और रंगपंचमी पर दोबारा बुलाया जाता है। ग्रामीण इसे वर्षों पुरानी परंपरा और आस्था से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, सांप के काटने की स्थिति में चिकित्सकीय उपचार में देरी जानलेवा हो सकती है; ऐसे में तत्काल अस्पताल पहुंचना जरूरी है।
नहीं लिया जाता शुल्क, भंडारे में लगता है प्रसाद
अखाड़े में किसी से उपचार के नाम पर राशि नहीं ली जाती। श्रद्धालु अपनी इच्छा से नारियल, अगरबत्ती और पूजन सामग्री चढ़ाते हैं। इसी सामग्री से प्रसाद और भंडारे की व्यवस्था की जाती है। नागपंचमी और रंगपंचमी पर यहां सुबह से शाम तक आयोजन चलता है और सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
सेवा सिंह, श्रद्धालु ग्रामीण ने बताया कि वे हर नागपंचमी और रंगपंचमी पर यहां एकत्रित होते हैं। वहीं ग्राम नदियाटोला के चूरन सिंह के अनुसार, सांप काटने वाले लोगों के लिए दोनों पर्वों पर यह आयोजन किया जाता है।