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मध्यप्रदेश

निलंबन आदेश पर उठे सवाल: धुंधले हस्ताक्षर, अधूरा दस्तावेज; वन विभाग की पारदर्शिता पर प्रश्न

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
निलंबन आदेश पर उठे सवाल: धुंधले हस्ताक्षर, अधूरा दस्तावेज; वन विभाग की पारदर्शिता पर प्रश्न

वनरक्षक पर कार्रवाई की पुष्टि, लेकिन स्पष्ट आदेश और आधिकारिक जानकारी नहीं होने से बढ़ी चर्चाएं

दमोह/मडियादो। पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र के मडियादो वन परिक्षेत्र में पदस्थ वनरक्षक सूर्यकांत उईके के निलंबन की कार्रवाई के बाद अब वन विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई निलंबन आदेश की प्रति में हस्ताक्षर स्पष्ट नहीं दिखाई दे रहे हैं, वहीं दस्तावेज भी अधूरा प्रतीत हो रहा है। ऐसे में कार्रवाई की पारदर्शिता और आधिकारिक दस्तावेजों की विश्वसनीयता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

निलंबन आदेश के अनुसार, अधीक्षक केन घड़ियाल अभ्यारण्य, खजुराहो के पत्र क्रमांक 1110, दिनांक 17 जुलाई 2026 की अनुशंसा पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत वनरक्षक सूर्यकांत उईके को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय परिक्षेत्र कार्यालय गहरीघाट, पन्ना टाइगर रिजर्व निर्धारित किया गया है तथा नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने का उल्लेख किया गया है।

वन परिक्षेत्र अधिकारी जे.पी. मिश्रा ने निलंबन की पुष्टि करते हुए बताया कि आदेश में कई आरोप शामिल हैं, लेकिन मामला विभागीय जांच से जुड़ा होने के कारण उन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।

निलंबन आदेश पर उठे सवाल: धुंधले हस्ताक्षर, अधूरा दस्तावेज; वन विभाग की पारदर्शिता पर प्रश्न - 2

वन विभाग ने यह आदेश ज़ारी किया

हालांकि, कार्रवाई की पुष्टि के बावजूद स्पष्ट, पठनीय और अधिकृत निलंबन आदेश अथवा विभागीय प्रेस नोट सार्वजनिक नहीं किए जाने से कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि विभाग ने नियमानुसार कार्रवाई की है, तो पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्पष्ट दस्तावेज और आधिकारिक जानकारी जारी करना आवश्यक माना जा रहा है। इससे न केवल भ्रम और अटकलों पर विराम लगेगा, बल्कि विभाग की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।

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