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धार

नोटिस के बाद भी कार्रवाई नहीं, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
नोटिस के बाद भी कार्रवाई नहीं, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

 

अतिक्रमण की सूचना पर बीट में कर्मचारी नहीं मिला, निरीक्षण के बाद जारी हुआ स्पष्टीकरण नोटिस; कार्रवाई की फाइल अब तक आगे नहीं बढ़ी

   धार। जंगल और वनभूमि की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले वन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायत, मौके का निरीक्षण और संबंधित कर्मचारी को जारी स्पष्टीकरण नोटिस के बावजूद मामले में अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह भी है कि यदि लापरवाही के मामलों में नोटिस जारी करने के बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ेगी तो वन क्षेत्र की निगरानी और सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?

     मामला धार वन मंडल की धार रेंज के नीमखेड़ा सब रेंज की उकाला बीट का बताया जा रहा है। 30 जुलाई को अतिक्रमण की सूचना पर डिप्टी रेंजर रमेश निगम मौके पर पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान संबंधित वनरक्षक आशीष शर्मा मौके पर मौजूद नहीं मिले। बताया गया कि उनसे मोबाइल पर संपर्क का प्रयास किया गया। एक नंबर बंद मिला, जबकि दूसरे नंबर पर कॉल करने के बावजूद जवाब नहीं मिला। इसके बाद डिप्टी रेंजर ने स्वयं क्षेत्र का निरीक्षण किया।

      खबर के बाद जारी हुआ नोटिस, फिर खामोशी

  मामला सामने आने और खबर प्रकाशित होने के बाद विभागीय स्तर पर संबंधित कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगा गया। नोटिस जारी होने से उम्मीद जगी थी कि विभाग मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करेगा, लेकिन समय बीतने के बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। अब सवाल यह है कि नोटिस के बाद फाइल किस स्तर पर अटकी है और जिम्मेदारी तय करने में देरी क्यों हो रही है?

     अतिक्रमण से राजस्व भूमि तक बदल गया मामला

     सूत्रों के अनुसार मौके के निरीक्षण के दौरान प्रारंभिक तौर पर अतिक्रमण की स्थिति बताई गई थी। बाद में मामले को आपसी विवाद और राजस्व भूमि से जुड़ा बताया गया। संबंधित वनकर्मी की मौके पर मौजूदगी को लेकर भी अलग-अलग बातें सामने आईं। इन विरोधाभासी स्थितियों ने मामले की निष्पक्ष जांच की जरूरत और बढ़ा दी है।

    नीमखेड़ा-चाकलिया में पहले भी उठते रहे सवाल

     नीमखेड़ा और चाकलिया सब रेंज में अतिक्रमण को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। चाकलिया क्षेत्र में वन क्षेत्र में पोल खड़े किए जाने की बात कही गई थी। वहीं एक स्थान से लोहे के दरवाजे चोरी होने की जानकारी भी सामने आई थी। इन मामलों में कार्रवाई की स्थिति को लेकर भी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

     गश्त पर सवाल, जिम्मेदारी तय होना जरूरी

     स्थानीय लोगों का कहना है कि वनकर्मियों की नियमित गश्त और बीट में मौजूदगी ही जंगल की सुरक्षा की पहली कड़ी है। ऐसे में अतिक्रमण की सूचना के बाद संबंधित कर्मचारी का मौके पर नहीं मिलना और बाद में कार्रवाई का मामला केवल नोटिस तक सीमित रहना गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि विभागीय स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

    मामले में संबंधित एसडीओ का पक्ष जानने के लिए संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

           इनका कहना है

“मेरी जानकारी में मामला आया है। मैं इस संबंध में एसडीओ से बात करता हूं और मामले की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई के संबंध में चर्चा करूंगा।”

लाल सुधाकर सिंह, प्रभारी डीएफओ, धार

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