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भोपाल

नियुक्तियों के विवाद से परेशान कांग्रेस ने बदली रणनीति: अब जिलाध्यक्ष नहीं, समन्वय समितियां तय करेंगी नाम  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
नियुक्तियों के विवाद से परेशान कांग्रेस ने बदली रणनीति: अब जिलाध्यक्ष नहीं, समन्वय समितियां तय करेंगी नाम

 

19 विभागों और 34 प्रकोष्ठों में होने वाली नियुक्तियों पर नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी; सहमति के बाद ही प्रदेश मुख्यालय पहुंचेगी सूची

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर लगातार सामने आने वाले विवाद, गुटबाजी और नामों पर खींचतान से बचने के लिए पार्टी ने अब अपनी रणनीति बदलने का फैसला किया है। आने वाले महीनों में प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक 19 विभागों और 34 प्रकोष्ठों में नियुक्तियां प्रस्तावित हैं। पार्टी इस बार नियुक्तियों को लेकर विरोध की स्थिति नहीं बनने देना चाहती। इसलिए नाम तय करने की प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करते हुए जिला और संभाग स्तर की समन्वय समितियों की भूमिका बढ़ाई जा रही है।

नई व्यवस्था में जिलाध्यक्ष अपनी ओर से सीधे नाम प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय नहीं भेज सकेंगे। पहले संभावित नामों पर स्थानीय समन्वय समिति में चर्चा होगी। समिति की सहमति के बाद ही सूची प्रदेश संगठन को भेजी जाएगी। माना जा रहा है कि यह व्यवस्था अगले साल से शुरू होने वाले चुनावों से पहले संगठन में बेहतर तालमेल और आपसी सहमति बनाने की कोशिश है।

जिलाध्यक्षों के चयन पर हुआ था विवाद

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की कोशिश रही है कि संगठन में नियुक्तियां अधिक से अधिक सहमति से हों। हालांकि संगठन सृजन अभियान के दौरान केंद्रीय पर्यवेक्षकों की अनुशंसा से बनाए गए जिलाध्यक्षों को लेकर कई जिलों में विवाद सामने आए थे। कुछ जगह विरोध जिला मुख्यालय से निकलकर भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय तक पहुंच गया था।

इसके बाद जिला कार्यकारिणियों के गठन में पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं से व्यापक विचार-विमर्श किया। इससे शिकायतों और विरोध के मामले अपेक्षाकृत कम हुए। अब कांग्रेस इसी मॉडल को आगामी नियुक्तियों में भी लागू करने की तैयारी कर रही है।

विधायक से लेकर वरिष्ठ नेता तक होंगे समिति में

जिला स्तर की नियुक्तियों के लिए संबंधित जिला और संभाग समन्वय समितियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इनमें क्षेत्र के विधायक, पूर्व विधायक, सांसद, पूर्व सांसद, जिला व ब्लॉक पंचायत अध्यक्ष, नगर निगम महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता शामिल होंगे।

किसी पद के लिए नाम तय करने से पहले समिति में उस पर चर्चा होगी। सहमति बनने के बाद जिलाध्यक्ष सूची प्रदेश मुख्यालय भेजेंगे। प्रदेश संगठन को यदि लगेगा कि किसी सक्रिय कार्यकर्ता या वरिष्ठ नेता को सूची में जगह नहीं मिली है, तो नाम पर दोबारा विचार करने के लिए कहा जा सकेगा।

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