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इंदौर

न्यायिक समिति की रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश; 20 लाख मुआवजे की सिफारिश,12 मौतों पर स्थिति स्पष्ट नहीं  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
न्यायिक समिति की रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश; 20 लाख मुआवजे की सिफारिश,12 मौतों पर स्थिति स्पष्ट नहीं

 

इंदौर। भागीरथपुरा के बहुचर्चित दूषित पानी कांड में 36 मौतों की जांच कर रही एक सदस्यीय न्यायिक समिति ने अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी है। रिपोर्ट फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है और रजिस्ट्रार के पास सुरक्षित रखी गई है। हालांकि, रिपोर्ट में सामने आए प्रमुख निष्कर्षों ने मामले में प्रशासनिक और तकनीकी लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं?

जानकारी के मुताबिक,जांच समिति ने 36 मौतों में से 24 मौतों को दूषित पानी से हुई मौत माना है,जबकि 12 मामलों में स्थिति स्पष्ट नहीं बताई गई है। दूषित पानी से हुई मौतों के मामलों में मृतकों के परिजनों को 20 लाख रुपए मुआवजा देने की सिफारिश किए जाने की जानकारी की चर्चा है। वहीं, दूषित पानी से प्रभावित लोगों के लिए 5 लाख रुपए मुआवजे की अनुशंसा की गई है।

पाइपलाइन बदलने में देरी को माना अहम वजह

जांच में दूषित पानी की समस्या के पीछे पाइपलाइन से जुड़े काम में हुई देरी को प्रमुख कारण माना गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि समय रहते पाइपलाइन बदलने का काम पूरा कर लिया जाता तो दूषित पानी की स्थिति बनने से रोकी जा सकती थी। पाइपलाइन बदलने की प्रक्रिया और टेंडर में देरी को लेकर नगर निगम के जल विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

जनप्रतिनिधियों और महापौर परिषद को राहत

रिपोर्ट में सामने आई जानकारी के अनुसार घटना के लिए जनप्रतिनिधियों और महापौर परिषद को जिम्मेदार नहीं माना गया है। यानी इस स्तर पर उन्हें क्लीन चिट दी गई है। जांच समिति ने मुख्य रूप से प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की दिशा में निष्कर्ष दिए हैं।

    रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। संबंधित पक्षों के अधिवक्ताओं को रजिस्ट्रार के पास रिपोर्ट का अध्ययन करने की अनुमति दी गई है। रिपोर्ट सार्वजनिक करने और पक्षकारों को इसकी प्रति उपलब्ध कराने की मांग पर अब हाईकोर्ट के आगामी आदेश का इंतजार है।

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