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भोपाल

   नेपाल की बाढ़ में भोपाल के एक परिवार के 29 रिश्तेदार लापता, आखिरी फोन पर बोले 'हम नहीं बचेंगे, बच्चों का ख्याल रखना!'  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
   नेपाल की बाढ़ में भोपाल के एक परिवार के 29 रिश्तेदार लापता, आखिरी फोन पर बोले 'हम नहीं बचेंगे, बच्चों का ख्याल रखना!'

 

गोसाई कुंड की यात्रा पर गए थे सभी श्रद्धालु, अचानक आई बाढ़ से मची तबाही; बस भी बह गई, पुल टूटने से राहत कार्य प्रभावित!

    भोपाल। नेपाल के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल गोसाई कुंड की धार्मिक यात्रा पर गया भोपाल से जुड़ा एक पूरा परिवार अब गहरे संकट में है। पूर्णिमा के अवसर पर दर्शन के लिए निकले एक ही कुनबे के 29 श्रद्धालु अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद से लापता हैं। इनमें परिवार के कई करीबी रिश्तेदार शामिल हैं। परिजनों के मुताबिक इनमें जेठ-जेठानी, देवर-देवरानी, दीदी-जीजाजी सहित परिवार के अन्य सदस्य भी थे।

    देवकी अधिकारी ने बताया कि लापता लोगों में उनके परिवार के 4 सदस्य भी शामिल हैं। बाढ़ आने के बाद वहां हालात इतनी तेजी से बिगड़े कि श्रद्धालुओं को भोजन और अपना सामान तक छोड़कर जान बचाने के लिए पहाड़ी क्षेत्र की ओर भागना पड़ा। सुरक्षित जगह की तलाश में उन्होंने पहाड़ पर बने एक मकान की छत पर शरण ली।

     फोन पर बताया था कि बस बह गई

     देवकी अधिकारी के अनुसार, यात्रियों ने फोन पर परिजनों को बताया था कि जिस बस से वे यात्रा पर गए थे, वह तेज बहाव की चपेट में आकर बह चुकी है। इसके बाद सभी लोग किसी तरह अपनी जान बचाकर मकान की छत पर पहुंचे थे। लगातार बढ़ते पानी के बीच उनकी चिंता हर पल बढ़ती जा रही थी। बीते दिन सुबह करीब 9:30 बजे परिवार के लोगों की उनसे आखिरी बार बात हुई। उस समय फोन पर यात्रियों ने बताया कि पानी मकान के भीतर तक पहुंच चुका है और हालात बेहद खराब हैं। परिजनों के अनुसार फोन पर उन्होंने कहा था कि मकान आधा जलमग्न हो चुका है, हमारे बचने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। हमारे पीछे हमारे मासूम बच्चों का ध्यान रखना।

    इसके बाद फोन पर दूसरी तरफ से आवाज आनी बंद हो गई। खास बात यह रही कि बातचीत के दौरान फोन तत्काल बंद या विच्छेदित नहीं हुआ, लेकिन उसके बाद से 29 लोगों में से किसी से भी संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार के लोग लगातार फोन मिलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा।

न बस मिली, न यात्रियों का पता चला

    लापता श्रद्धालुओं को लेकर परिजनों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि अभी तक न तो उनकी बस का कोई पता चला है और न ही यात्रियों के बारे में कोई ठोस जानकारी सामने आई है। किसी के शव के मिलने की सूचना भी परिवार को नहीं मिली है। ऐसे में परिजन हर गुजरते घंटे के साथ किसी खबर का इंतजार कर रहे हैं।

घटनास्थल तक पहुंचना मुश्किल

     बाढ़ ने राहत और बचाव दल के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। त्रिशूली नदी पर बना मुख्य पुल बाढ़ में टूट गया है। इसके कारण घटनास्थल तक पहुंचने का सीधा रास्ता बंद हो गया है। सामान्य परिस्थितियों में जिस जगह तक करीब आधे घंटे में पहुंचा जा सकता था, वहां अब ग्रामीण और दुर्गम पहाड़ी रास्तों से पहुंचने में 6 से 8 घंटे तक लग रहे हैं। रास्ते बंद होने और पुल के टूट जाने से बचाव दल के लिए लापता लोगों तक जल्द पहुंचना मुश्किल हो रहा है। यही वजह है कि भोपाल में बैठे परिवार के लोगों की बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही है।

पीछे छूट गए बच्चों की चिंता

    29 श्रद्धालुओं के लापता होने से उनके पीछे रह गए छोटे बच्चों का भविष्य भी परिवार के सामने बड़ा सवाल बन गया है। आखिरी फोन कॉल में यात्रियों द्वारा बच्चों का ख्याल रखने की अपील ने परिजनों को और भावुक कर दिया है। भोपाल में रह रहे रिश्तेदार लगातार नेपाल में मौजूद अधिकारियों और बचाव दल से संपर्क की कोशिश कर रहे हैं।

    देवकी अधिकारी ने भारत और नेपाल सरकार से इस मामले में तत्काल बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि परिवार को अपने स्वजनों की कोई जानकारी नहीं मिल रही है। ऐसे में हर संभव माध्यम से तलाश तेज की जानी चाहिए और लापता श्रद्धालुओं की स्थिति के बारे में परिजनों को जल्द से जल्द स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।

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