भोपाल। मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ी सफलता हासिल करते हुए स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) ने तेंदुओं के शिकार और उनके अंगों की तस्करी करने वाले एक संगठित अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान श्योपुर और मुरैना क्षेत्र से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों की निशानदेही पर तेंदुओं की हड्डियां, अन्य अवशेष और शिकार में इस्तेमाल होने वाले लेग-होल्ड ट्रैप (फंदे) बरामद किए गए हैं।
पूरे मामले की शुरुआत 23 जुलाई 2026 को आगरा में वन विभाग और उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से हुई थी। वहां चार कथित वन्यजीव तस्करों के कब्जे से 10 तेंदुओं की खालें और अन्य वन्यजीव अवयव बरामद हुए थे। जांच में इस गिरोह के तार मध्यप्रदेश से जुड़ने पर एसटीएसएफ ने विशेष जांच दल गठित कर उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के कई इलाकों में छापेमारी शुरू की।

30 जुलाई को एसटीएसएफ, कूनो वन्यजीव वनमंडल, श्योपुर वनमंडल और मुरैना वनमंडल की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने 10 तेंदुओं के शिकार की बात स्वीकार की। जांच में सामने आया कि इनमें छह तेंदुओं का शिकार कूनो वन्यजीव वनमंडल, दो श्योपुर वनमंडल और दो चंबल अभयारण्य क्षेत्र में किया गया था। मामले में दो वन अपराध प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में इकराम, लज्जाराम, गोपाल, महेश, प्रकाश, हुब्बा (सभी निवासी ग्राम झार बरोदा, जिला श्योपुर) तथा गब्बर (निवासी हंसई, जिला मुरैना) शामिल हैं। सभी आरोपियों को विशेष न्यायालय, शिवपुरी में पेश कर रिमांड पर लिया गया है और विस्तृत पूछताछ जारी है।
यह कार्रवाई इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कूनो राष्ट्रीय उद्यान देश की महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चीता योजना का प्रमुख केंद्र है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में सक्रिय शिकार गिरोह का खुलासा वन्यजीव संरक्षण एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।