22 हजार पहले वसूलने का आरोप, सागर लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई; गरीबों के घर पर भी कमीशनखोरी के गंभीर आरोप
दमोह। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को पक्का घर दिलाने वाली सरकारी योजना में कथित रिश्वतखोरी का मामला सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दमोह जिले के जबेरा जनपद की परासई ग्राम पंचायत में सागर लोकायुक्त की टीम ने रोजगार सहायक राजेश सिंह लोधी को 8 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि हितग्राही से तीसरी किस्त जारी कराने और जियो टैगिंग के नाम पर कुल 30 हजार रुपए की मांग की गई थी, जिसमें 22 हजार रुपए पहले ही लिए जा चुके थे।
पीड़ित संजू रैकवार ने 13 जुलाई को लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के सत्यापन के बाद गुरुवार को पंचायत कार्यालय में ट्रैप कार्रवाई की गई। लोकायुक्त डीएसपी कमल सिंह उइके ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।
दमोह जिले में यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ महीनों में लोकायुक्त ने हटा के एक जूनियर इंजीनियर, तेजगढ़ पंचायत सचिव और शिक्षा विभाग के तीन कर्मचारियों सहित कई सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा है। इसके बावजूद सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा।
प्रधानमंत्री आवास जैसी जनकल्याणकारी योजना में रिश्वत मांगने के आरोप सामने आने से गरीब हितग्राहियों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। लगातार हो रही ट्रैप कार्रवाइयों के बाद भी सवाल बरकरार है कि क्या केवल गिरफ्तारी और एफआईआर से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, या फिर पूरे तंत्र की जवाबदेही तय कर दोषियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई भी होगी।