← वापस
इंदौर

रेट बढ़ाओ... जंगल बाद में बचा लेंगे!  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
रेट बढ़ाओ... जंगल बाद में बचा लेंगे!

 

इंदौर वन परिक्षेत्र इन दिनों फिर चर्चा में है। वजह हरियाली नहीं, बल्कि उन चर्चाओं की हरियाली है जो लकड़ी मंडी से लेकर वन नाकों, दफ्तरों,के गलियारों तक लहलहा रही हैं। शहर में कानाफूसी है कि यहां हर चीज में अव्वल रहने की होड़ है—चाहे संदिग्ध टीपी का मामला हो,या एक टीपी पर डबल नहीं अब तो एक संदिग्ध टीपी पर पांच बार परिवहन हो या आरा मशीनों पर अवैध गुट्के फांचरे चिरान का हो या फिर अवैध जलाऊ लकड़ी के गुट्के-फांचरे के परिवहन का काला कारोबार।

   इन दिनों चर्चा यह भी है कि अवैध गुट्के-फांचरे का कारोबार अचानक एक अगस्त से इसलिए थम गया था कि "इंट्री रेट" का मौसम बदल रहा है। मंडी में उड़ती खबरों के मुताबिक फरमान कुछ ऐसा है—"रेट बढ़ाओ... नहीं तो काम बंद करो।" अब यह फरमान किसने दिया,इसकी पुष्टि तो नहीं,लेकिन लकड़ी मंडी में यह चर्चा आग की तरह फैल रही है।

   वैसे चर्चा है कि आफिस में बैठकर आदेश देने वालों को शायद यह नहीं मालूम कि यह कोई सीक्रेट मिशन नहीं,बल्कि इंदौर की लकड़ी मंडी है। यहां फाइल से निकली बात चाय की दुकान तक पहुंचते देर नहीं लगती। यहां कोई राज ज्यादा दिन राज नहीं रहता,सब "आम" हो जाता है।

    बाजार में यह भी चर्चा है कि "सेवा शुल्क" का यह खेल वर्षों से सरकार के राजस्व पर भारी पड़ रहा। अब सुनने में आ रहा है कि पूरे मामले की शिकायत की तैयारी चल रही है और कथित तौर पर "इंट्री बाजों"और एक अधिकारी का नाम भी चर्चा में हैं। आखिर शिकायत होगी या नहीं,यह तो वक्त बताएगा,लेकिन मंडी की हवा इन दिनों कुछ ज्यादा ही गर्म है।

  एक व्यक्ति ने बताया कि हम तो पहले ही भरोसा करके धोखा खा चुके हैं,इसलिए अब दूरी बनाकर तमाशा देख रहे हैं। लेकिन इतना तय है कि सन्नाटा हमेशा शांति का संकेत नहीं होता। कई बार सबसे बड़ा धमाका उसी खामोशी के बाद होता है,जब किसी को संभलने का मौका भी नहीं मिलता।

   फिलहाल तो सलाह यही है कि गुट्के-फांचरे के रेट बढ़ा लीजिए, क्योंकि ऊपर वाला... मतलब भोपाल वाला... सब देख रहा है। और इंदौर का ""नाम तो चर्चा में पहले से ही है।

    अब इंतजार सिर्फ इस बात का है कि रेट पहले बढ़ेंगे या कार्रवाई पहले होगी?

     गुट्के फांचरे के रेट बढ़ाने की चर्चाएं तो चली और तीन दिन अवैध गुट्के फांचरे का परिवहन बंद भी रहा लेकिन चौथे दिन मतलब चार तारीख को शुरू हो गया। इस रेट बढ़ाने के खेल में भी एक शातिर ने खेला कर दिया ऐसी चर्चाएं चल रहीं हैं कि अवैध गुट्के फांचरे माफियाओं को शातिर अधिकारी ने कह दिया कि कुछ दिन बंद रहनें दो जो ज्यादा फड़फड़ा रहा है उसे भी पता चलना चाहिए कि समय बदल गया है और अब सत्ता उनके हाथों में है और वैसा ही हुआ जिन्होंने बोला था रेट बढ़ाओ अब उन्हें नहीं मालूम की शातिर ने उनके साथ खेला कर दिया और बुराई अलग से मिली। फ़ोटो एआई द्वारा निर्मित 

खबरें और भी हैं...