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भोपाल

सीएम हेल्पलाइन की रफ्तार पड़ी धीमी: 50 दिन से ज्यादा समय से 1.77 लाख शिकायतें लंबित, सरकार ने अफसरों को दिए सख्त निर्देश  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
सीएम हेल्पलाइन की रफ्तार पड़ी धीमी: 50 दिन से ज्यादा समय से 1.77 लाख शिकायतें लंबित, सरकार ने अफसरों को दिए सख्त निर्देश

 

भोपाल। आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायतों का बढ़ता अंबार चिंता का विषय बन गया है। प्रदेश के 55 जिलों में विभिन्न विभागों से जुड़ी 4 लाख 38 हजार 929 शिकायतों में से 1.77 लाख से अधिक शिकायतें 50 दिनों से ज्यादा समय से लंबित हैं। लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने अधिकारियों पर सख्ती करते हुए सभी कलेक्टरों को एक माह के भीतर लंबित शिकायतों के निराकरण के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के त्वरित समाधान के निर्देशों के बावजूद पिछले डेढ़ वर्ष में शिकायतों का शत-प्रतिशत निराकरण नहीं हो सका। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2025 से 20 जुलाई 2026 तक दर्ज 1 लाख 28 हजार 500 शिकायतों पर अब तक सुनवाई नहीं हुई, जबकि एल-3 और एल-4 स्तर की 1 लाख 92 हजार 220 शिकायतें तय समय सीमा से बाहर लंबित हैं।

100 दिन से अधिक समय से लंबित शिकायतों में राजस्व विभाग सबसे आगे है, जहां 30,403 मामले अटके हैं। इसके बाद गृह विभाग में 15,773 और नगरीय विकास एवं आवास विभाग में 3,366 शिकायतें लंबित हैं। विषयवार देखें तो एफआईआर दर्ज नहीं करने की 5,016, विवेचना में देरी की 4,714, अवैध कब्जे की 3,923, भूमि सीमांकन की 1,454, प्रधानमंत्री आवास योजना की 942 और अवैध कॉलोनियों से जुड़ी 886 शिकायतें अब भी समाधान की प्रतीक्षा में हैं।

बड़े शहरों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। भोपाल में 20,603, रीवा में 18,200, इंदौर में 17,651, ग्वालियर में 14,962, जबलपुर में 13,597 और सागर में 11,939 शिकायतें लंबित हैं। इनमें बड़ी संख्या 50 दिन से अधिक पुरानी है। बढ़ते लंबित मामलों ने शिकायत निवारण व्यवस्था की प्रभावशीलता और विभागीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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