संसद में केंद्र ने कहा- मिडिल ईस्ट युद्ध के दौरान उपभोक्ताओं को मिली राहत; विपक्ष ने मांगा सामान्य पेट्रोल का विकल्प
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने संसद में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण (E-20) की नीति का मजबूती से बचाव करते हुए दावा किया कि यदि एथनॉल ब्लेंडिंग लागू नहीं होती, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के कारण देश में पेट्रोल 125 रुपये प्रति लीटर से भी अधिक महंगा हो सकता था। सरकार के अनुसार, मिडिल ईस्ट संकट के दौरान एथनॉल मिश्रण की वजह से उपभोक्ताओं को प्रति लीटर करीब 30 रुपये की राहत मिली और उन्हें 94.77 रुपये प्रति लीटर की दर से पेट्रोल उपलब्ध कराया गया।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने संसद में बताया कि एथनॉल देश में ही तय कीमत पर खरीदा जाता है, इसलिए वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का इस पर असर नहीं पड़ता। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि गरीबों के लिए निर्धारित अनाज या एफसीआई के सब्सिडी वाले चावल का उपयोग एथनॉल उत्पादन के लिए नहीं किया गया।
हालांकि, सड़क परिवहन मंत्रालय ने स्वीकार किया कि E-10 ईंधन के लिए डिजाइन किए गए बीएस-3, बीएस-4 और बीएस-6 वाहनों में E-20 पेट्रोल डालने पर माइलेज में 2 से 6 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि E-20 लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल कंपनियों और तेल कंपनियों से व्यापक सलाह-मशविरा किया गया तथा इंजन, पार्ट्स और प्रदूषण मानकों की वैज्ञानिक जांच के बाद ही फैसला लिया गया।
वहीं, आम आदमी पार्टी ने सरकार की E-20 नीति का विरोध करते हुए नई दिल्ली में राष्ट्रीय टाउनहॉल आयोजित किया। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मांग की कि पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को E-20 और सामान्य पेट्रोल में से अपनी पसंद का विकल्प दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विकल्प नहीं दिया गया तो पार्टी प्रधानमंत्री आवास तक मार्च करेगी। कार्यक्रम में वाहन मालिकों और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों ने भी E-20 से जुड़ी कथित तकनीकी समस्याओं पर चिंता जताई।