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इंदौर

सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का मामला, हाईकोर्ट ने समय दिया   

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का मामला, हाईकोर्ट ने समय दिया 

 

17 अगस्त तक जवाब देना था, केंद्र-राज्य सरकार ने पक्ष नहीं रखा 

    इंदौर। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को बिजली,साफ पेयजल, शौचालय,बाउंड्री वॉल,यूनिफॉर्म और सुरक्षित भवन जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं मिलने का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंचा है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए 2 महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में अब भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।

    इस मामले में शुक्रवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई हुई। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ के सामने केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जवाब पेश नहीं किया गया। इस पर कोर्ट ने मामले को 4 सप्ताह बाद तत्काल सुनवाई के लिए लगाने के निर्देश दिए। सरकार को पहले 17 अगस्त तक अपना जवाब दाखिल करना था, लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी जवाब पेश नहीं किया गया।

    सेंधवा के सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता बीएल जैन ने प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त समस्याओं को लेकर 22 अप्रैल को जनहित याचिका दायर की थी। मामले की पिछली सुनवाई 1 जुलाई को हुई थी। उस समय हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को याचिका में उठाए गए मुद्दों पर जवाब देने के लिए 17 अगस्त तक का समय दिया था। शुक्रवार की सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक तुगनावत ने कोर्ट को बताया कि निर्धारित समय निकल जाने के बावजूद सरकार की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया है। इस पर कोर्ट ने दोनों सरकारों को जवाब देने के लिए 4 सप्ताह की अतिरिक्त मोहलत दे दी।

        सरकारी स्कूलों में अभाव   

    याचिका में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलने का मुद्दा उठाया गया है। इसमें शिक्षकों और प्राचार्यों के खाली पदों के साथ स्कूल भवनों की स्थिति और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि बच्चों को बेहतर और सुरक्षित वातावरण में शिक्षा मिलना जरूरी है, लेकिन कई स्कूलों में बिजली, पेयजल, शौचालय और सुरक्षित भवन जैसी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार है। इसके बावजूद सुविधाओं की कमी के कारण विद्यार्थियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने में हो रही देरी के चलते समस्या के समाधान में भी विलंब हो रहा है।

      बच्चे आंदोलन कर रहे

    प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सरकारी स्कूलों की मूलभूत समस्याओं को लेकर विद्यार्थियों के प्रदर्शन के मामले भी सामने आ रहे हैं। बच्चे हाथों में अपनी मांगों से जुड़ी तख्तियां लेकर स्कूल की सुविधाओं के लिए आवाज उठाने को मजबूर हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि जिन बच्चों को अपना समय पढ़ाई में लगाना चाहिए, उन्हें स्कूल की बुनियादी जरूरतों के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र और राज्य सरकार को अगले 4 सप्ताह में अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद कोर्ट याचिका में उठाए गए मुद्दों पर आगे की सुनवाई करेगा।

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