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धार

सरकारी दफ्तरों में दम तोड़ रहीं शिकायत पेटियां: कहीं गायब, कहीं वर्षों से नहीं खुले ताले; जनता का भरोसा भी हुआ कम  

आशीष यादव
आशीष यादव
सरकारी दफ्तरों में दम तोड़ रहीं शिकायत पेटियां: कहीं गायब, कहीं वर्षों से नहीं खुले ताले; जनता का भरोसा भी हुआ कम  

धार के कई सरकारी कार्यालयों में शिकायत पेटी सिर्फ दिखावा, ऑनलाइन व्यवस्था के दौर में पुराना तंत्र हुआ बेअसर; कुछ विभागों ने पड़ताल के बाद पेटी लगाने का दिया आश्वासन

आशीष यादव, राजवाड़ा दर्पण धार।कभी आमजन और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का सबसे आसान माध्यम मानी जाने वाली शिकायत पेटियां अब सरकारी कार्यालयों में महज औपचारिकता बनकर रह गई हैं। धार जिले के विभिन्न सरकारी विभागों की पड़ताल में सामने आया कि कई कार्यालयों में शिकायत पेटियां वर्षों से खाली पड़ी हैं, कई जगह उन पर जंग लगे ताले लटक रहे हैं, जबकि कुछ महत्वपूर्ण कार्यालयों में शिकायत पेटी की व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब शिकायत पेटियों की नियमित निगरानी और उपयोग नहीं हो रहा, तो आम नागरिक इस व्यवस्था पर भरोसा कैसे करे।

        जांच के दौरान कृषि विभाग कार्यालय में शिकायत पेटी तो मिली, लेकिन उस पर 'शिकायत पेटी' तक अंकित नहीं था। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि उन्हें याद नहीं कि आखिरी बार इसमें कब शिकायत प्राप्त हुई थी। उनका कहना है कि अब अधिकांश शिकायतें जनसुनवाई, सीएम हेल्पलाइन और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से प्राप्त होती हैं। खनिज विभाग में भी शिकायत पेटी लगी मिली, लेकिन उसका ताला कब खोला गया, इसकी स्पष्ट जानकारी किसी के पास नहीं थी।

          जनजातीय कार्य विभाग के कार्यालय में शिकायत पेटी नहीं मिली, जबकि यहां जिलेभर के शिक्षक और कर्मचारी नियमित रूप से आते-जाते हैं। पशु चिकित्सा विभाग में अधिकारियों ने बताया कि पूरे सत्र में शिकायत पेटी में एक भी शिकायत नहीं आई। अधिकांश लोग सीधे कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्या बताते हैं, जिनका मौके पर ही समाधान कर दिया जाता है। जिला अस्पताल में शिकायत पेटी मौजूद है और सिविल सर्जन के अनुसार उसकी नियमित समीक्षा की जाती है, हालांकि लंबे समय से उसमें कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई।

       पड़ताल में यह भी सामने आया कि नगर पालिका, आईएस विभाग, डीपीसी, आबकारी जैसे आमजन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यालयों में शिकायत पेटी नहीं थी। मत्स्य विभाग, शिक्षा विभाग और जनपद कार्यालयों में शिकायत पेटियां तो मिलीं, लेकिन उनकी स्थिति उपेक्षित नजर आई। कई स्थानों पर ऐसा लगा मानो वर्षों से ताले तक नहीं खुले हों। कुछ अधिकारियों ने स्वीकार किया कि शिकायतें सीधे सुनकर रजिस्टर में दर्ज की जाती हैं और उसी आधार पर कार्रवाई की जाती है।

      वन विभाग के जिला कार्यालय में शिकायत पेटी नहीं मिलने पर डीएफओ विजयानंतम टीआर ने कहा कि जल्द ही शिकायत पेटी स्थापित कर दी जाएगी। वहीं कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने कहा कि यदि कहीं शिकायत पेटी नहीं है या व्यवस्था निष्क्रिय है तो इसकी जांच कर आवश्यक सुधार कराया जाएगा। जहां पुरानी पेटियां अनुपयोगी हो चुकी हैं, वहां नई शिकायत पेटियां लगाने की भी बात कही गई है।

      हालांकि सभी कार्यालयों की तस्वीर एक जैसी नहीं रही। पुलिस अधीक्षक कार्यालय और जिला पंचायत में शिकायत पेटियां व्यवस्थित मिलीं। अधिकारियों के अनुसार वहां समय-समय पर पेटी खोली जाती है और प्राप्त शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई भी की जाती है।

 शिकायत पेटी क्यों जरूरी?

सभी सरकारी कार्यालयों में शिकायत पेटी लगाने का प्रावधान।

प्रवेश द्वार या स्वागत कक्ष जैसी प्रमुख जगह पर लगाई जानी चाहिए।

नोडल अधिकारी को प्रत्येक सप्ताह शिकायत पेटी खोलकर समीक्षा करनी होती है।

शिकायतकर्ता की गोपनीयता बनाए रखने का प्रावधान।

शिकायत के साथ आवश्यक दस्तावेज संलग्न किए जा सकते हैं।

शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी निराकरण के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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