बांस पर चादर की झोली में अस्पताल पहुंची 22 वर्षीय महिला, भिंगारा से चालीस टाटरी तक रास्ता नहीं; ग्रामीण बोले- विकास के दावों के बीच आज भी आदिवासी बेहाल
खामगांव। आजादी के 80 साल बाद भी आदिवासी इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी किस कदर जानलेवा साबित हो सकती है, इसका दर्दनाक मामला जलगांव जामोद तहसील के सातपुड़ा क्षेत्र से सामने आया है। सड़क के अभाव में सांप के काटने से पीड़ित 22 वर्षीय गर्भवती आदिवासी महिला को ग्रामीण बांस और चादर की झोली बनाकर जंगल के रास्ते अस्पताल ले गए, लेकिन समय पर बेहतर उपचार नहीं मिलने से उसकी मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति आक्रोश है।
जानकारी के अनुसार चालीस टाटरी निवासी सदुरी राधेश्याम खरात करीब ढाई से तीन महीने की गर्भवती थीं। 25 अगस्त की दोपहर सांप ने उन्हें काट लिया। परिजन और ग्रामीण उन्हें पहले जलगांव जामोद में प्राथमिक उपचार के लिए ले गए। हालत गंभीर होने पर खामगांव के सामान्य अस्पताल लाया गया, जहां से अकोला रेफर किया गया। उपचार के दौरान महिला की मौत हो गई।
शव भी झोली में ले जाना पड़ा
महिला के पोस्टमार्टम के बाद शव भिंगारा लाया गया। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शव को फिर बांस और चादर से बनी झोली में करीब चार किलोमीटर के जंगल के रास्ते चालीस टाटरी ले जाना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क होती तो महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता था।
सातपुड़ा क्षेत्र में भिंगारा, गोमाल-1, गोमाल-2 और चालीस टाटरी गांव बसे हैं। भिंगारा से चालीस टाटरी के बीच करीब चार किलोमीटर का रास्ता घने जंगल से होकर गुजरता है। ग्रामीणों को जंगली जानवरों के खतरे के बीच आवागमन करना पड़ता है। जलगांव जामोद से भिंगारा तक सड़क का डामरीकरण हो चुका है, लेकिन आगे सड़क नहीं होने से ग्रामीणों की मुश्किलें बरकरार हैं।
ग्रामीणों ने शासन और जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए सड़क सहित मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। राधेश्याम खरात और अन्य ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।