← वापस
उज्जैन

सावन सोमवार और नागपंचमी एक साथ; लाखों श्रद्धालुओं के आने का अनुमान, 24 घंटे होंगे नागचंद्रेश्वर के दर्शन  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
सावन सोमवार और नागपंचमी एक साथ; लाखों श्रद्धालुओं के आने का अनुमान, 24 घंटे होंगे नागचंद्रेश्वर के दर्शन

 

16 अगस्त रात 12 बजे खुलेंगे पट,17 अगस्त रात 12 बजे तक दर्शन; महाकाल मंदिर में भीड़ नियंत्रण से लेकर मेडिकल कैंप तक विशेष इंतजाम

       उज्जैन। महाकाल की धर्मनगरी उज्जैन में इस बार सावन सोमवार और नागपंचमी का दुर्लभ संयोग एक ही दिन बन रहा है। इसे देखते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर के शीर्ष पर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए पूरे 24 घंटे खुले रहेंगे। प्रशासन को करीब 7से8 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।

             रात 12 बजे खुलेंगे पट

भगवान नागचंद्रेश्वर के पट 16 अगस्त की रात 12 बजे खोले जाएंगे। इसके बाद 17 अगस्त की रात 12 बजे तक लगातार दर्शन की व्यवस्था रहेगी। वर्ष में विशेष अवसर पर ही खुलने वाले भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे।

भीड़ के लिए अलग रूट और बैरिकेडिंग

श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष रूट तैयार किए हैं। प्रमुख स्थानों पर बैरिकेडिंग कर भीड़ को नियंत्रित करने की व्यवस्था की गई है। दर्शन व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही को निर्धारित मार्गों से संचालित किया जाएगा।

मेडिकल कैंप और एंबुलेंस तैनात

भीड़ और गर्मी को देखते हुए प्रमुख स्थानों पर मेडिकल कैंप और एंबुलेंस तैनात रहेंगी। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही अस्थायी जूता स्टैंड बनाए गए हैं। बुजुर्ग और जरूरतमंद श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

    एक दिन,दो बड़े पर्व और 24 घंटे दर्शन के इस विशेष संयोग को लेकर उज्जैन में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ जुटने की संभावना है।

नागचंद्रेश्वर मंदिर की विशेष जानकारी 

नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन के महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव नागचंद्रेश्वर स्वरूप में विराजमान हैं। मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की नागफण पर विराजमान अद्भुत प्रतिमा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नागराज तक्षक ने भगवान शिव की आराधना कर उनसे महाकाल वन में निवास का वरदान प्राप्त किया था। इसी कारण यहां नागचंद्रेश्वर के रूप में भगवान शिव की पूजा की जाती है।

   इस मंदिर की सबसे खास परंपरा यह है कि इसके पट वर्ष में केवल एक बार, नागपंचमी के अवसर पर 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं। शेष पूरे वर्ष मंदिर के पट बंद रहते हैं। नागपंचमी पर यहां दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि नागचंद्रेश्वर के दर्शन से सर्पदोष और नाग संबंधी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

खबरें और भी हैं...