एक शिक्षक सप्ताह में तीन दिन संकुल कार्यालय में, दूसरे पर पांच कक्षाओं का बोझ; सवालों पर चुप रहे जिम्मेदार अधिकारी
दमोह/पटेरा। आदिवासी अंचलों में शिक्षा सुधार के सरकारी दावों के बीच पटेरा विकासखंड के नवीन प्राथमिक कन्या शाला, नागमणी के धसरा टोला की तस्वीर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। यहां 34 आदिवासी छात्र-छात्राओं की पढ़ाई एक शिक्षक के संकुल कार्यालय में अटैच किए जाने से प्रभावित हो रही है। खास बात यह है कि शासन पहले ही अटैचमेंट व्यवस्था पर रोक लगा चुका है, इसके बावजूद शिक्षक को सप्ताह में तीन दिन करीब 25 किलोमीटर दूर पटेरा संकुल कार्यालय में तैनात किया गया है।
विद्यालय में दो शिक्षकों की पदस्थापना है, लेकिन एक शिक्षक के संकुल कार्यालय में रहने से पूरी व्यवस्था एक शिक्षक के भरोसे चल रही है। प्रभारी प्रधानाध्यापक नीरज सिंह चौहान को अकेले पांच कक्षाओं की पढ़ाई, शासकीय अभिलेखों का संधारण, मध्यान्ह भोजन की निगरानी और अन्य प्रशासनिक कार्य संभालने पड़ रहे हैं। इससे बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित होने लगी है।
ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग के मनमाने आदेशों का खामियाजा आदिवासी बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जब शासन ने अटैचमेंट पर रोक लगा रखी है, तो फिर किस नियम के तहत शिक्षक को संकुल कार्यालय में बैठाया जा रहा है। उन्होंने तत्काल अटैचमेंट समाप्त कर शिक्षक को विद्यालय में पदस्थ करने की मांग की है।
इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी सत्यम चौरसिया से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं डीपीसी मुकेश द्विवेदी ने डीईओ से पक्ष लेने की बात कहकर विस्तृत जवाब देने से परहेज किया। अधिकारियों की चुप्पी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि शिक्षा विभाग शासन के आदेशों का पालन कर 34 आदिवासी बच्चों की पढ़ाई पटरी पर लाने के लिए क्या कदम उठाता है।