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मध्यप्रदेश

ट्रेन के डिब्बे से बॉलीवुड के स्टूडियो तक, बुंदेलखंड के दृष्टिबाधित गायक सुनील लोधी की संघर्ष और सफलता की अनूठी दास्तान!  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
ट्रेन के डिब्बे से बॉलीवुड के स्टूडियो तक, बुंदेलखंड के दृष्टिबाधित गायक सुनील लोधी की संघर्ष और सफलता की अनूठी दास्तान!

 

सागर। जिले के एक छोटे से गांव में जन्मे सुनील लोधी की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब ईश्वर की कृपा और इंसान की मेहनत एक साथ मिलती है, तो किस्मत बदलते देर नहीं लगती। जन्म से ही दृष्टिबाधित सुनील का शुरुआती जीवन बेहद तंगहाली और मुश्किलों में बीता। लेकिन, नीम करौली बाबा पर बनी फिल्म 'हनुमान अंश' में उनके गाए एक भजन ने उनको देशभर में लोकप्रिय कर दिया।

       औपचारिक शिक्षा से वंचित सुनील के पास बचपन से ही संगीत की अद्भुत कुदरती देन थी। वे हाथों में तमूरा थामकर बुंदेली लोकगीत और भक्ति गीत गाया करते थे। अपने परिवार का पेट पालने के लिए उन्होंने ट्रेनों के डिब्बों में कटोरा लेकर भजन गाना शुरू किया। यात्रियों से मिलने वाले छोटे-मोटे दान से ही उनका गुजारा चलता था, लेकिन उन्होंने कभी अपनी परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेके।

    2019 में वायरल हुआ भजन, मुंबई से बुलावा आया

      सुनील की जिंदगी में असली मोड़ वर्ष 2019 के दौरान आया, जब एक स्थानीय संगीत प्रेमी और यूट्यूबर की नजर उनके हुनर पर पड़ी। उन्होंने सुनील के गाए भजनों की रिकॉर्डिंग कर सोशल मीडिया पर अपलोड करना शुरू किया। उनका पारंपरिक भजन 'मोरे संकट के कटैया हनुमान' इंटरनेट पर रातों-रात लोकप्रिय हो गया। यूट्यूब पर करोड़ों दर्शकों द्वारा पसंद किए जाने और विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर रील्स बनने के बाद उनकी पहचान एक सशक्त गायक के रूप में स्थापित होने लगी। इस बढ़ती प्रसिद्धि के बाद संगीत निर्माता पंकज वीआरके ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें रिकॉर्डिंग के लिए मुंबई आमंत्रित किया।

    'हनुमान अंश' की रिलीज के बाद मिली अपार सफलता

     मुंबई के स्टूडियो में रिकॉर्ड किए गए भजनों में से 'मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई' गाना निर्देशक विशाल चतुर्वेदी को बेहद पसंद आया। उन्होंने नीम करोली बाबा के जीवन और हनुमान भक्ति पर केंद्रित अपनी फिल्म 'हनुमान अंश' में इस गाने को शामिल कर लिया। अगस्त 2026 में जब यह फिल्म सिनेमाघरों में आई, तो सुनील की भक्तिमय आवाज ने दर्शकों के दिलों को गहराई से छू लिया। आज यह गाना संगीत प्रेमियों के बीच जबरदस्त धूम मचा रहा है और लोग उनके पुराने भजनों को भी उत्साह से सुन रहे हैं। ट्रेन के डिब्बों से शुरू हुआ सुनील लोधी का यह सफर आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा की एक नई मिसाल बन चुका है।

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