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धार

तिरपाल हटाया तो निकला खैर का ‘काला खेल’, पीछा करने पर वन अमले की गाड़ी पलटाने की कोशिश  

राजवाड़ा दर्पण ब्यूरो
राजवाड़ा दर्पण ब्यूरो
तिरपाल हटाया तो निकला खैर का ‘काला खेल’, पीछा करने पर वन अमले की गाड़ी पलटाने की कोशिश

 

रात 3 बजे 3 टन बेशकीमती लकड़ी से भरी पिकअप पकड़ी; दो आरोपी गिरफ्तार, दो फरार, वाहन में मिलीं दो नंबर प्लेटें

धार। रात का सन्नाटा...घड़ी में करीब 3 बजे का वक्त...और घाटाबिल्लौद रोड पर वन विभाग की उड़नदस्ता टीम एक पिकअप का पीछा कर रही थी। मुखबिर की सूचना थी कि महिंद्रा पिकअप में अवैध तरीके से खैर की लकड़ी ले जाई जा रही है। जैसे ही संदिग्ध पिकअप नजर आई, टीम ने उसे रोकने की कोशिश की। आरोप है कि चालक ने रफ्तार बढ़ा दी और पीछा कर रही वन अमले की गाड़ी को टक्कर मारकर पलटाने की कोशिश की। उड़नदस्ता प्रभारी राजेंद्र राठौर इस दौरान बाल-बाल बच गए।

तिरपाल हटाया तो निकला खैर का ‘काला खेल’, पीछा करने पर वन अमले की गाड़ी पलटाने की कोशिश

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टीम ने पीछा नहीं छोड़ा। कुछ दूर जाकर पिकअप को रोक लिया गया। वन विभाग के अनुसार, वाहन रोकने के बाद उसमें सवार लोगों ने अमले के साथ हाथापाई और हमला करने की कोशिश की। टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए दो लोगों को पकड़ लिया, जबकि दो आरोपी मौके से फरार हो गए।

तिरपाल के नीचे छिपा था 3 टन खैर

पिकअप पर तिरपाल बंधा हुआ था। टीम ने जब तिरपाल हटाया तो अंदर बड़ी मात्रा में खैर की लकड़ी देखकर अधिकारी भी चौंक गए। पिकअप में करीब 3 टन खैर की लकड़ी भरी हुई थी। वन अमले ने लकड़ी और पिकअप को जब्त कर धार रेस्ट हाउस पहुंचाया।

जब्त वाहन का पंजीयन क्रमांक एमपी-12-जेडडी-4830 बताया गया है। पकड़े गए आरोपियों में जावेद शेख पिता मोहम्मद अमीन, निवासी नीमच, को चालक बताया गया है। दूसरे आरोपी की पहचान शादाब खान पिता इफजूल रहमान, निवासी रतलाम के रूप में हुई है। दो अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

दो नंबर प्लेट मिलने से जांच और गहराई

वन विभाग की कार्रवाई के दौरान वाहन से दो नंबर प्लेट मिलने की जानकारी भी सामने आई है। इन नंबर प्लेटों का इस्तेमाल कहां और किस वाहन में किया गया, इसकी जांच की जा रही है। विभाग इस बिंदु को भी महत्वपूर्ण मान रहा है।

प्रारंभिक पूछताछ में खैर की लकड़ी हरदा जिले के खिरकिया क्षेत्र से भरकर लाने और बड़नगर की ओर ले जाने की बात सामने आई है। हालांकि लकड़ी वास्तव में कहां से काटी गई, किसने कटवाई और इसे कहां पहुंचाया जाना था, इसका खुलासा जांच के बाद ही होगा।

रिमांड में खुलेगा नेटवर्क का राज?

वन विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि इस पूरे मामले के पीछे कौन लोग हैं। आशंका जताई जा रही है कि पकड़े गए आरोपियों के जरिए खैर की लकड़ी के बड़े नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी। आरोपियों को न्यायालय में पेश कर रिमांड लेने की तैयारी है। पूछताछ में लकड़ी की कटाई, परिवहन, खरीदार और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी।

कार्रवाई डीएफओ धार विजयनंथम टीआर के निर्देश और एसडीओ सुरेश बरोले के नेतृत्व में की गई। उड़नदस्ता प्रभारी राजेंद्र राठौर के साथ वनपाल संतोष उपाध्याय, जितेंद्र चौधरी और धर्म सिंह सोलंकी सहित टीम कार्रवाई में शामिल रही।

तिरपाल हटाया तो निकला खैर का ‘काला खेल’, पीछा करने पर वन अमले की गाड़ी पलटाने की कोशिश

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पहले अलीराजपुर में भी सामने आया था खैर का बड़ा मामला

खैर की अवैध कटाई और कारोबार को लेकर अलीराजपुर क्षेत्र का मामला भी चर्चा में रहा है। जून 2024 में गुजरात में खैर की लकड़ी से भरा ट्रक पकड़े जाने के बाद जांच की कड़ियां अलीराजपुर के मालवई गांव तक पहुंची थीं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, एक निजी डिपो में बड़ी मात्रा में खैर की लकड़ी जमा होने की बात सामने आई थी। गुजरात वन विभाग और अन्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद मामले की जांच आगे बढ़ी थी।

अब धार में 3 टन खैर से भरी पिकअप पकड़े जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—जंगल से खैर की बेशकीमती लकड़ी किसने कटवाई? पिकअप में किसने भरवाई? दो नंबर प्लेटें क्यों मिलीं? और इस पूरे खेल के पीछे कौन-कौन लोग हैं?वन विभाग की जांच इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही है।

       इनका कहना —

डीएफओ विजयनंथम टीआर, धार

उड़नदस्ता एवं वन परिक्षेत्र की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को पकड़ा है और करीब 3 टन खैर की लकड़ी जब्त की है। इस मामले में वन अपराध पंजीबद्ध कर कार्रवाई जारी है। जब्त खैर लकड़ी की कीमत करीब डेढ़ लाख रुपए, जबकि वाहन की कीमत लगभग चार से पांच लाख रुपए आंकी गई है।

   प्रारंभिक जांच में इस मामले में बड़े नेटवर्क की आशंका सामने आई है। आरोपियों को न्यायालय में पेश कर रिमांड लिया जाएगा। रिमांड के दौरान पूछताछ में लकड़ी के स्रोत और इससे जुड़े अन्य लोगों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

वाहन से यदि फर्जी नंबर प्लेट के इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो इस संबंध में आरटीओ को भी पत्राचार किया जाएगा। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।

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