देशभर से पहुंचे भक्तों ने किया पाद पूजन, 7 फीट ऊंची दसभुजा मां काली के दर्शन किए; श्मशान भूमि में बना आश्रम बना आस्था का प्रमुख केंद्र

बड़वाह। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को बड़वाह स्थित श्री श्री 1008 टाटंबरी सरकार आश्रम में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही आश्रम परिसर में हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इंदौर, उज्जैन, गुजरात, पटना, रायसेन, सेंधवा, धामनोद सहित आसपास के शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरु चरणों में नतमस्तक होने पहुंचे। भक्तों ने पूज्य गुरुदेव टाटंबरी सरकार का विधि-विधान से पाद पूजन कर आशीर्वाद लिया तथा परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की।
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान आश्रम में भजन-कीर्तन, व्यास पूजा, हवन-पूजन और महाआरती का आयोजन किया गया। पूरे परिसर में "जय गुरुदेव" और माता काली के जयघोष गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने गुरु को ईश्वर तक पहुंचने का मार्गदर्शक बताते हुए उनके प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त की। महाआरती के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसकी शुरुआत मां नर्मदा को भोग अर्पित कर की गई। इसके बाद हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ प्रसादी ग्रहण कर गुरु कृपा का अनुभव किया।
टाटंबरी सरकार आश्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं लौटता। आश्रम में प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं और जरूरतमंदों के लिए प्रसादी की व्यवस्था रहती है। यही सेवा भावना आश्रम को क्षेत्र ही नहीं, बल्कि दूर-दराज़ से आने वाले भक्तों के बीच भी विशेष पहचान दिलाती है।
आश्रम की पहचान यहां स्थापित करीब सात फीट ऊंची दस भुजाओं वाली मां काली की दिव्य प्रतिमा भी है। श्मशान भूमि में बने इस आश्रम का आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को विशेष शांति और आत्मिक ऊर्जा का अनुभव कराता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां काली के दर्शन कर मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं।
टाटंबरी सरकार द्वारा काली घाट पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्नान घाट का निर्माण भी कराया गया है। आज यह घाट नर्मदा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए प्रमुख आस्था केंद्र बन चुका है, जहां प्रतिदिन भक्तों का आगमन होता है।
इस अवसर पर टाटंबरी सरकार ने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि "जीवन में सदैव अच्छे कर्म करते चलो, सेवा और सदाचार का मार्ग अपनाओ। सफलता और ईश्वर की कृपा स्वयं आपके जीवन में आएगी।" गुरु के इस संदेश को सुन श्रद्धालुओं ने धर्म, सेवा और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। गुरु पूर्णिमा के इस भव्य आयोजन ने पूरे क्षेत्र को श्रद्धा, भक्ति और सेवा की भावना से सराबोर कर दिया।
