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धार

त्योहार की थाली पर महंगाई की मार, 7 से 45% तक बढ़े रोजमर्रा के सामान के दाम

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
त्योहार की थाली पर महंगाई की मार, 7 से 45% तक बढ़े रोजमर्रा के सामान के दाम

बाजार में रौनक बढ़ी, लेकिन किचन का बजट बिगड़ा; राशन के बाद मिठाई-फल, कपड़े और उपहार के लिए जेब हो रही खाली

धार। त्योहारों का मौसम शुरू होते ही बाजारों में रौनक लौट आई है, लेकिन बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। रोजमर्रा की जरूरतों के सामान के दाम बढ़ने से घर की रसोई का बजट बिगड़ गया है। लोगों के मुताबिक, कई खाद्य और किराना सामग्री की कीमतों में करीब 7 से 45 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। ऐसे में महीने का राशन जुटाने के बाद त्योहार की खरीदारी के लिए अलग बजट बनाना मुश्किल हो रहा है।

गृहिणियों का कहना है कि पहले जिस राशि में महीनेभर का राशन आ जाता था, अब उसी सामान के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है। दाल, तेल, शक्कर, मसाले, आटा, चावल से लेकर सब्जियों तक बढ़े खर्च का सीधा असर परिवार की बचत पर पड़ रहा है। कई परिवार अब महंगी वस्तुओं की मात्रा कम कर रहे हैं और जरूरी सामान को प्राथमिकता दे रहे हैं।

      त्योहार का खर्च अलग चुनौती

त्योहार पर मिठाई, फल, कपड़े, राखी, उपहार और पूजा सामग्री की खरीदारी के साथ घर में पकवान बनाने का खर्च भी बढ़ जाता है। यही वजह है कि बाजार में ग्राहक सामान खरीदने से पहले कीमत पूछ रहे हैं और अलग-अलग दुकानों पर तुलना भी कर रहे हैं। कई परिवार पूरे परिवार के लिए कपड़े खरीदने के बजाय बच्चों या जरूरत के हिसाब से खरीदारी करने की योजना बना रहे हैं।

      बाजार की रौनक, जेब पर दबाव

त्योहार के चलते कपड़े, मिठाई, गिफ्ट आइटम और अन्य सामान की दुकानों पर ग्राहकी बढ़ी है। दुकानदारों को आने वाले दिनों में बिक्री और बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि ग्राहकों का कहना है कि सीमित आय में रोजमर्रा का खर्च संभालने के बाद त्योहार की परंपराएं निभाना चुनौती बन गया है। लोगों ने जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर निगरानी और अनावश्यक मूल्यवृद्धि पर कार्रवाई की मांग की है।

इन सामानों के दाम भी बढ़े

सामग्री| मौजूदा दाम (₹)

शक्कर| 65-70 किलो

नारियल| 35

सोया तेल| 170 लीटर

काजू| 1000 किलो

लाल मिर्च| 450 किलो

बादाम| 1200 किलो

धनिया पाउडर| 250 किलो

पिस्ता| 2600 किलो

हल्दी| 350 किलो

चायपत्ती| 450 किलो

चावल| 80-100 किलो

   बचत पर सीधा असर: राशन, सब्जी, दूध और अन्य जरूरी खर्च बढ़ने से महीने के अंत में बचत के लिए कम राशि बच रही है। त्योहार का अतिरिक्त खर्च कई परिवारों को बचत से पैसा निकालने के लिए मजबूर कर रहा है।

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