एक ही दिन दो मामलों में आरोपी-गवाह की भूमिका बदली; बार-बार उन्हीं गवाहों के नाम सामने आने से जांच की जरूरत
दमोह/हटा। हटा थाना पुलिस की अवैध शराब और सट्टे के खिलाफ कार्रवाई के दावों के बीच पुलिस सिटिजन पोर्टल पर दर्ज एफआईआर के रिकॉर्ड ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले 20 दिनों की कार्रवाई में आरोपी और गवाहों के नामों को लेकर ऐसी विसंगतियां सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
17 अगस्त को बदली आरोपी-गवाह की भूमिका: इस दिन दर्ज दो शराब प्रकरणों में एक मामले में समीर पिता असरफ खान आरोपी और राजकुमार पिता भगवानदास साहू गवाह हैं। इसमें 22 पाव शराब जब्त होना दर्ज है। दूसरे मामले में राजकुमार आरोपी और समीर गवाह हैं। इसमें 23 पाव शराब जब्ती और घटनास्थल बस स्टैंड से चिरौल तिराहा बताया गया है। एक ही दिन दोनों की भूमिका बदलने से रिकॉर्ड की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
12 अगस्त का रिकॉर्ड भी सवालों में: रिकॉर्ड के मुताबिक इस दिन पुरानी तहसील कचहरी क्षेत्र से समीर से 25 पाव शराब जब्त की गई थी। कम अंतराल में एक ही व्यक्ति का अलग-अलग मामलों में आरोपी और गवाह के रूप में सामने आना भी जांच का विषय है।
सट्टे के दोनों मामलों में एक ही गवाह: 13 अगस्त को सट्टा पर्ची से जुड़े दो मामलों में रोहित जोगी गवाह दर्ज हैं। आरोपियों के रूप में राजू रैकवार और नन्ना लोधी के नाम हैं। दोनों प्रकरणों में 500-500 रुपए की जब्ती और नोटिस पर छोड़े जाने का उल्लेख है।
थाने से चंद कदम दूर गतिविधियां तो निगरानी पर सवाल: बस स्टैंड और पुरानी तहसील कचहरी थाना से करीब 50 मीटर दूर बताए जा रहे हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में बार-बार शराब-सट्टे की कार्रवाई सामने आने से पुलिस की निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बार-बार उन्हीं गवाहों के नाम क्यों? बताया जा रहा है कि करीब आधा दर्जन गवाहों के नाम पुलिस कार्रवाई के मामलों में बार-बार दर्ज होते रहे हैं। पिछले एक साल के रिकॉर्ड में भी यही नाम कई प्रकरणों में सामने आने की बात कही जा रही है। इसकी पुष्टि होने पर स्वतंत्र गवाहों के चयन और मौके पर उनकी वास्तविक मौजूदगी की भी जांच जरूरी होगी।
फिलहाल रिकॉर्ड में मिली विसंगतियों को किसी व्यक्ति या पुलिसकर्मी के खिलाफ दोष का प्रमाण नहीं माना जा सकता। यह रिकॉर्ड की त्रुटि है या कार्रवाई की प्रक्रिया में चूक, जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। एसडीओपी केपी सिंह ने कहा कि मामला आपके द्वारा बताया गया है, इस संबंध में जांच कराई जाएगी। अब देखना होगा कि जांच केवल एफआईआर रिकॉर्ड तक सीमित रहती है या जब्ती, गवाह, घटनास्थल और पूरी कार्रवाई की जमीनी हकीकत तक पहुंचती है।