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इंदौर

दस साल पहले चार राज्यों का सफर तय कर इंदौर पहुंचे थे सिद्धि विनायक  

अथर्व राठौर विशेष रिपोर्ट
अथर्व राठौर विशेष रिपोर्ट
दस साल पहले चार राज्यों का सफर तय कर इंदौर पहुंचे थे सिद्धि विनायक  

- ढाई क्विंटल की ब्लैक स्टोन प्रतिमा बनी आस्था का केंद्र

- दक्षिण भारतीय शिल्पकला से बनी गणेश-रिद्धि-सिद्धि की दुर्लभ प्रतिमा

    इंदौर। शहर के समाजवादी इंदिरा नगर स्थित श्री सिद्धि विनायक गणेश मंदिर आज श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां विराजित भगवान गणेश और रिद्धि-सिद्धि की दुर्लभ प्रतिमा अपनी भव्यता और शिल्पकला के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र है। यह प्रतिमा 2016 दक्षिण भारत से लगभग चार राज्यों का सफर तय कर इंदौर लाई गई थी।

दस साल पहले चार राज्यों का सफर तय कर इंदौर पहुंचे थे सिद्धि विनायक   - 2

मंदिर समिति के अनुसार करीब ढाई क्विंटल वजनी यह प्रतिमा मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र,तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से होकर विशेष व्यवस्था के साथ इंदौर पहुंची थी।

    मंदिर समिति के महेश राठौर (राणावत) ने बताया कि वर्ष 2016 में पूज्य संत श्रीश्री 1008 अवधूत श्री टाटंबरी सरकार के बताए स्थान पर मंदिर की स्थापना की गई थी। तभी से यहां भगवान सिद्धि विनायक की नियमित पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन होते आ रहे हैं। विशेष रूप से गणेशोत्सव के दौरान मंदिर को दक्षिण भारतीय शैली में सजाया जाता है और भगवान का अलग-अलग पारंपरिक वेशभूषा में श्रृंगार किया जाता है।

ब्लैक स्टोन की प्रतिमा क्यों है खास

     मंदिर में स्थापित भगवान गणेश और रिद्धि-सिद्धि की प्रतिमा ब्लैक स्टोन (काला ग्रेनाइट/कृष्ण शिला) से निर्मित है। यह पत्थर अपनी मजबूती, प्राकृतिक चमक और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। दक्षिण भारत के कई प्राचीन मंदिरों में भी इसी प्रकार के काले पत्थर से देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाई जाती हैं। इस पत्थर पर की गई बारीक नक्काशी प्रतिमा को जीवंत स्वरूप प्रदान करती है और वर्षों बाद भी इसकी चमक बनी रहती है।

मन्नत के धागों से जुड़ी है श्रद्धा

     मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां की आस्था है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर भगवान सिद्धि विनायक के दरबार में पहुंचते हैं और मंदिर परिसर में मन्नत का धागा बांधते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई प्रार्थना शीघ्र पूरी होती है। मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त दोबारा मंदिर पहुंचकर भगवान का आशीर्वाद लेते हैं और प्रसाद अर्पित करते हैं।

फलों के रस से अभिषेक 

     मंदिर समिति के राजू राठौर राजा राठौर ने बताया कि विशेष अवसरों पर भगवान गणेश का फलों के रस से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद उन्हें तिरुपति बालाजी शैली का मुकुट पहनाया जाता है और सुगंधित पानडी इत्र अर्पित किया जाता है। भगवान को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है, जिसके बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया जाता है।

     गणेशोत्सव के दौरान प्रतिदिन महाआरती, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण होता है। आरती के समय पूरा समाजवादी इंदिरा नगर "गणपति बप्पा मोरया" के जयघोष से गूंज उठता है। यही कारण है कि यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि इंदौर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

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