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धार के जंगलों पर अतिक्रमण का शिकंजा, 20 हजार हेक्टेयर वन भूमि अब भी कब्जे में; वन विभाग के सामने दोहरी चुनौती

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
धार के जंगलों पर अतिक्रमण का शिकंजा, 20 हजार हेक्टेयर वन भूमि अब भी कब्जे में; वन विभाग के सामने दोहरी चुनौती


डेढ़ साल में 3,500 हेक्टेयर भूमि कराई मुक्त, वनाधिकार पट्टों की आड़ में बढ़ रहे अवैध कब्जे; स्टाफ की कमी से कार्रवाई प्रभावित

धार। आदिवासी बाहुल्य धार जिले में जंगलों को बचाने की चुनौती लगातार बढ़ती जा रही है। वनाधिकार कानून के तहत पात्र वनवासियों को अधिकार दिए जाने के साथ ही कुछ क्षेत्रों में इसकी आड़ लेकर वन भूमि पर अवैध कब्जे बढ़ने लगे हैं। जंगल माफिया पेड़ों की कटाई कर नई वन भूमि पर अतिक्रमण की कोशिश कर रहे हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 42,539 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण चिन्हित किया गया था। पिछले डेढ़ वर्ष में विभाग ने करीब 3,500 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है, लेकिन अब भी लगभग 20 हजार हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जा बना हुआ है।

वन विभाग का कहना है कि जिले में करीब 17 हजार हेक्टेयर भूमि पर पात्र आदिवासी परिवारों को वनाधिकार पट्टे दिए जा चुके हैं। हालांकि कुछ लोग निर्धारित सीमा से अधिक वन भूमि पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे वन संरक्षण की चुनौती और गंभीर हो गई है। विभाग का दावा है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से की जा रही है। ग्राम वन समितियों और ग्रामीणों के सहयोग से पिछले छह माह में ही करीब 600 हेक्टेयर भूमि बिना किसी विवाद के मुक्त कराई गई।

डीएफओ विजयानंथम टी.आर. के अनुसार वर्ष 2026 में मई तक 589.81 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई है, जबकि वर्ष 2025 में 3,097 हेक्टेयर भूमि वापस वन विभाग के कब्जे में लाई गई थी। अब इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पौधरोपण कर दोबारा अतिक्रमण रोकने की तैयारी की जा रही है।

वन संरक्षण की इस मुहिम में कर्मचारियों की कमी भी बड़ी बाधा बनी हुई है। वनपाल, रेंजर और एसडीओ स्तर के कई पद लंबे समय से रिक्त हैं। सीमित अमले के कारण विशाल वन क्षेत्र की नियमित निगरानी और अवैध कब्जों पर प्रभावी कार्रवाई करना कठिन हो रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कई वन कर्मचारियों से मैदानी ड्यूटी के बजाय कार्यालयीन कार्य भी लिया जा रहा है, जिससे निगरानी व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

डीएफओ विजयानंथम टी.आर. ने कहा कि नई वन भूमि पर अतिक्रमण रोकना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। करीब 20 हजार हेक्टेयर भूमि को चरणबद्ध तरीके से अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। पात्र वनवासियों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे, लेकिन अवैध कब्जे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

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