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धार

धारनाथ बाबा निकले नगर भ्रमण पर, राजशाही ठाठ देख उमड़ा आस्था का सैलाब  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
धारनाथ बाबा निकले नगर भ्रमण पर, राजशाही ठाठ देख उमड़ा आस्था का सैलाब

 

गार्ड ऑफ ऑनर के बाद निकली सवारी, आगे भक्तों ने झाड़ू लगाकर किया स्वागत; दो दर्जन से ज्यादा झांकियां-अखाड़े बने आकर्षण

धार। सालभर जिस दिन का इंतजार धार ही नहीं, आसपास के जिलों के श्रद्धालु भी करते हैं, वह सोमवार आस्था और भक्ति के रंग में रंग गया। श्रावण माह की समाप्ति के दूसरे सोमवार को धार के आराध्य भगवान धारनाथ का पारंपरिक छबीना शाही ठाठ-बाट और गाजे-बाजे के साथ निकला। मान्यता है कि साल में एक बार धारनाथ बाबा स्वयं नगर भ्रमण पर निकलकर अपनी प्रजा का हाल जानने आते हैं। शाम करीब 4 बजे धारेश्वर महादेव मंदिर से पालकी यात्रा शुरू हुई। ‘जय धारनाथ बाबा’ के जयघोष से शहर गूंज उठा।

सवारी शुरू होने से पहले भगवान धारनाथ के पवित्र मुखौटे का पूजन और आरती की गई। विधायक नीना विक्रम वर्मा, कलेक्टर राजीव रंजन मीणा, एसपी सचिन शर्मा और विश्वास पांडे सहित जनप्रतिनिधियों ने पूजा-अर्चना की। इसके बाद पुलिस सशस्त्र बल की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सलामी के बाद माझी समाज के युवाओं ने भगवान शिव की पालकी को कंधों पर उठाया और नगर भ्रमण शुरू हुआ।

    पालकी के आगे श्रद्धालुओं ने लगाई झाड़ू

धारनाथ बाबा के स्वागत में श्रद्धा का अनूठा दृश्य देखने को मिला। पालकी के आगे श्रद्धालु हाथों में झाड़ू लेकर मार्ग साफ करते हुए चल रहे थे। इनमें जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल रहे। शहर के प्रमुख मार्गों पर जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पालकी रोककर भगवान की पूजा-अर्चना और आरती की। दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं।

    डमरू की थाप पर झूमे भक्त, झांकियों ने बांधा समां

छबीने में दो दर्जन से ज्यादा झांकियां और अखाड़े शामिल हुए। अधिकांश झांकियां भगवान शिव की महिमा पर आधारित थीं। बड़ी शिव प्रतिमा, पिपलेश्वर महादेव का चल समारोह और विभिन्न सामाजिक संगठनों की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। डीजे और बैंड पर भोलेनाथ के भजनों के साथ झांझ-मंजीरे और डमरू की थाप गूंजती रही। ‘बम लहरी बाबा बम लहरी’ और ‘भोले हो भोले’ जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए।

    राजवंश के दौर से चली आ रही परंपरा

धारनाथ के छबीने की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है। मान्यता के अनुसार राजवंश काल से भगवान धारनाथ शाही पालकी में नगर भ्रमण करते हैं। समय के साथ सवारी का स्वरूप बदला, लेकिन परंपरा और आस्था आज भी कायम है। पहले पालकी को बैलगाड़ी और फूल-पत्तियों से सजाया जाता था, अब भव्य आयोजन के साथ पूरे शहर में भ्रमण कराया जाता है।

    400 से ज्यादा पुलिसकर्मी, ड्रोन से निगरानी

छबीने को लेकर पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात के व्यापक इंतजाम किए। 10 डीएसपी, 17 थाना प्रभारी व एसआई स्तर के अधिकारियों सहित 400 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रहे। दो एसएफ कंपनियां, पांच मोबाइल टीमें और 10 बाइक टीमें भी निगरानी में लगी रहीं। दो ड्रोन और करीब 100 कैमरों से पूरे मार्ग पर नजर रखी गई। ऊंची इमारतों पर भी पुलिस जवान तैनात रहे। श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह शरबत, केला, खिचड़ी और दूध वितरण की व्यवस्था की गई।

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