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मध्यप्रदेश

वान बांध बना तीन जिलों की जीवनरेखा, 41% जलभराव से किसानों को राहत; सिंचाई और पेयजल की मजबूत उम्मीद

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
वान बांध बना तीन जिलों की जीवनरेखा, 41% जलभराव से किसानों को राहत; सिंचाई और पेयजल की मजबूत उम्मीद

 अकोला, बुलढाणा और अमरावती के लाखों लोगों को मिल रहा लाभ, खेती में बढ़ी पैदावार और भूजल स्तर में हुआ सुधार

अकोला। महाराष्ट्र के अकोला, बुलढाणा और अमरावती जिलों के किसानों और नागरिकों के लिए वान नदी पर बना वारी हनुमान बांध किसी वरदान से कम नहीं है। तेल्हारा तहसील के वारी गांव के पास स्थित इस बांध में वर्तमान में 41 प्रतिशत जलसंग्रह दर्ज किया गया है, जो जिले के सभी बांधों में सबसे अधिक है। इससे खरीफ और आगामी सिंचाई सीजन को लेकर किसानों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

वर्ष 1979 में स्वीकृत इस परियोजना का निर्माण वर्ष 2001 में पूरा हुआ था। इसके बाद से वान बांध ने क्षेत्र की तस्वीर बदल दी। बांध की नहरों के माध्यम से तेल्हारा तहसील के 41 गांवों और बुलढाणा जिले के 13 गांवों तक सिंचाई का पानी पहुंचने लगा। इससे हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित हुई और पारंपरिक खेती के साथ बागवानी तथा अन्य नकदी फसलों का रकबा भी बढ़ा। किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

बांध से अकोला और बुलढाणा जिले के कई शहरों एवं गांवों को पेयजल की आपूर्ति भी होती है। इसके कारण हिवरखेड सहित कई क्षेत्रों में पेयजल संकट काफी हद तक समाप्त हुआ है। साथ ही भूजल स्तर में सुधार, बाढ़ नियंत्रण और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

किसान मनोज राठी का कहना है कि पहले 17 एकड़ भूमि होने के बावजूद सिंचाई की कमी के कारण पूरी खेती नहीं हो पाती थी, लेकिन वान बांध की नहरों से पानी मिलने के बाद पूरी जमीन पर खेती संभव हुई और आय के साथ सामाजिक सम्मान भी बढ़ा है।

पर्यावरण प्रेमी मनीष भुडके के अनुसार, वान बांध ने क्षेत्र के कई गांवों की पेयजल समस्या दूर करने के साथ भूजल स्तर को भी ऊपर उठाया है। वारी स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर के कारण इसे हनुमान सागर भी कहा जाता है। आज यह परियोजना क्षेत्र में हरित क्रांति और जल प्रबंधन का सफल उदाहरण बनकर उभरी है।

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