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राष्ट्रीय

वैश्विक शहरीकरण की नई तस्वीर सामने आई, दुनिया के 20 सबसे बड़े शहरों में भारत का दबदबा!

राजवाड़ा दर्पण
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वैश्विक शहरीकरण की नई तस्वीर सामने आई, दुनिया के 20 सबसे बड़े शहरों में भारत का दबदबा!

     नई दिल्ली। दुनियाभर में लोग बेहतर जीवन, रोजगार, शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं की खोज में तेजी से गांवों से शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। इस पलायन के कारण वैश्विक स्तर पर महानगरों की जनसंख्या में अभूतपूर्व उछाल देखा जा रहा है। वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के वर्ष 2026 के नवीनतम अनुमानों पर आधारित एक हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि दुनिया के सबसे बड़े शहरों पर इस समय आबादी का भारी दबाव है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि भविष्य में इन क्षेत्रों को बेहतर आवास, सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवाएं, सुगम यातायात और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कितनी अधिक आवश्यकता पड़ने वाली है।

गांव से महानगरों की ओर बढ़ता इंसानी कारवां

      मौजूदा समय में दुनिया की आधी से अधिक आबादी शहरी क्षेत्रों में जीवन बसर कर रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2050 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इस तीव्र विस्तार को संभालने के लिए नए रिहायशी इलाकों, मजबूत सड़कों, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था, उद्यानों, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों के निर्माण की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही, जलवायु परिवर्तन के दौर में इन शहरों को पर्यावरण के अनुकूल बनाना भी एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए नगर नियोजन और सरकारी नीतियों को नए सिरे से तैयार करना होगा।

आबादी के मामले में शीर्ष पर काबिज 10 बड़े शहर

      ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चीन का शंघाई शहर लगभग 2.47 करोड़ की जनसंख्या के साथ इस समय विश्व का सबसे बड़ा शहर बना हुआ है। इसके ठीक बाद भारत की राजधानी दिल्ली का स्थान आता है, जो करीब 2.34 करोड़ की आबादी के साथ दूसरे पायदान पर है। इस सूची में तीसरे स्थान पर किन्शासा (डीआर कांगो) है, जबकि भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई चौथे स्थान पर काबिज है। इसके बाद क्रमशः बीजिंग (पांचवें), कराची (छठे), शेन्जेन (सातवें), ग्वांगझोउ (आठवें), कानो (नौवें) और चेंगदू (दसवें) स्थान पर आते हैं। यह रुझान साफ दर्शाता है कि एशिया और अफ्रीका के शहर जनसंख्या के मामले में सबसे आगे चल रहे हैं।

वैश्विक सूची में शामिल अन्य प्रमुख महानगर और भारतीय शहर

     इस सूची में 11वें पायदान पर तुर्किये का इस्तांबुल शहर है। इसके बाद भारत के दो और प्रमुख शहर बेंगलुरु 12वें और कोलकाता 13वें स्थान पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। सूची में आगे बढ़ते हुए नाइजीरिया का लागोस, पाकिस्तान का लाहौर, रूस का मॉस्को और भारत का चेन्नई शहर शामिल हैं। इनके बाद जकार्ता, तियानजिन और 20वें स्थान पर दक्षिण अफ्रीका का जोहान्सबर्ग आता है। इस तरह दुनिया के शीर्ष 20 शहरों में भारत के पांच बड़े महानगर—दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और चेन्नई—अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे हैं, जो देश में हो रहे तीव्र शहरी विकास की गवाही देते हैं।

जनसंख्या वृद्धि और गणना के बदलते पैमाने

      इस रिपोर्ट में केवल कुल आबादी ही नहीं, बल्कि उसके बढ़ने की गति को भी रेखांकित किया गया है। कांगो के किन्शासा शहर में सालाना 5.13 प्रतिशत की दर से सबसे तेज वृद्धि हो रही है, जिसके बाद बेंगलुरु 4.1 प्रतिशत और कराची 4.03 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर के साथ तेजी से बढ़ रहे हैं।

     इस रैंकिंग को तैयार करने का एक विशेष आधार है। विभिन्न देशों में शहरों की भौगोलिक सीमाएं अलग-अलग तरह से तय की जाती हैं। कहीं सिर्फ नगर निगम क्षेत्र को गिना जाता है, तो कहीं पूरे महानगरीय क्षेत्र को शामिल किया जाता है। यही कारण है कि टोक्यो या जकार्ता जैसे कुछ बड़े शहर अन्य सूचियों में शीर्ष पर दिख सकते हैं, लेकिन इस रिपोर्ट में उनका स्थान अलग है।

भविष्य की चुनौतियां और प्रबंधन की आवश्यकता

     यह रिपोर्ट केवल आंकड़ों का संकलन नहीं है, बल्कि यह भविष्य की बदलती दुनिया का एक आईना है। लगातार बढ़ती इस आबादी के लिए सरकारों को सस्ते एवं सुरक्षित मकान, प्रदूषण मुक्त वातावरण, पर्याप्त हरियाली और रोजगार के नए अवसर पैदा करने होंगे। विशेषकर युवा पीढ़ी की उम्मीदों को पूरा करने के लिए इन महानगरों को अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और रहने योग्य बनाना आने वाले समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

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